Thursday, December 20, 2018

تدليك الأطفال برفق "يخفف الألم"

خلصت دراسة علمية حديثة إلى أن تدليك الأطفال برفق يقلل من نشاط الدماغ المرتبط بالشعور بالألم.
ورصدت الدراسة، التي أجرتها جامعة أكسفورد وجامعة ليفربول جون موريس، نشاط الدماغ لدى 32 طفلاً أثناء إجراء فحوصات الدم.
وقالت الدراسة إنه جرى تدليك نصف الأطفال بفرشاة ناعمة مسبقًا، مشيرة إلى أن نشاط الدماغ المرتبط بالألم لدى هؤلاء الأطفال كان أقل بنسبة 40 بالمئة.
وقالت ريبيكا سلاتر، معدة الدراسة: "يبدو أن اللمس لديه القدرة على تسكين الألم دون التعرض لخطر الآثار الجانبية".
وقالت سلاتر: "يقوم الآباء بشكل بديهي بتدليك الأطفال"، مضيفة "إذا استطعنا أن نفهم بشكل أفضل الأسس العصبية والحيوية لتقنيات مثل تدليك الرضع، سيمكننا حينئذ تحسين النصيحة التي نقدمها للآباء حول كيفية إراحة أطفالهم".
وأشارت الدراسة إلى أن سرعة التدليك تعمل على تنشيط فئة من الخلايا العصبية الحسية في الجلد تدعى "الناقلات الحسية سي"، والتي سبق أن ثبت أنها تقلل الألم لدى البالغين.
لكن لم يكن واضحا ما إذا كان الأطفال لديهم نفس الاستجابة أم ما إذا كانت تتطور مع مرور الوقت.
وقالت سلاتر: "كان هناك دليل على أنه يمكن تنشيط الناقلات الحسية سي لدى الأطفال الرضع، وأن تدليكهم بطريقة بطيئة ولطيفة يمكن أن يثير تغييرات في نشاط الدماغ عند الرضع".
وأشارت سلاتر إلى أن الدراسة، التي نشرت في دورية "كرنت بيولوجي"، يمكنها أن توضح أدلة على تأثير الممارسات القائمة على اللمس، مثل تدليك الرضع، أو ما يسمى بـ "رعاية الكنغر" - التي تسمى بهذا الاسم لأنها مشابهة لكيفية حمل الكنغر لأبنائه - وذلك من خلال لمس جلد الأطفال المبتسرين (المولودون قبل الآوان) لجلد الأمهات لتشجيع الترابط بين الأمهات والرضع، وربما الحد من الألم.
وتضيف: "لقد أظهر العمل السابق أن اللمس قد يزيد من الترابط بين الآباء والرضع، ويقلل من التوتر لدى كل من الآباء والأطفال، ويقلل من مدة الإقامة في المستشفى."
ويخطط مؤلفو الدراسة الآن لتكرار تجربتهم مع الأطفال المبتسرين الذين لا تزال مساراتهم الحسية تتطور.
حذر موقع تويتر للتواصل الاجتماعي من وجود نشاط غير معتاد من جانب الصين والمملكة العربية السعودية فيما يتعلق بخلل في قائمة المساعدة والدعم بالموقع.
واكتشف تويتر هذا الخلل في الخامس عشر من الشهر الماضي وقام بإصلاحه في اليوم التالي.
وأوضح الموقع أن الخيار الذي كان موجودا في القائمة كان يتيح إمكانية التعرف على مفتاح الهاتف الخاص بالدولة التي يوجد فيها المستخدم ومدى تفعيل حسابه.
وأكد تويتر أن مستخدمين من دولتين قاموا بإرسال كميات هائلة من الاستفسارات باستخدام هذا الخيار إلى الموقع وهو ما جعل الإدارة تشك في وجود أنشطة جماعية ترعاها حكومات في هذا الصدد.
وأكد تويتر ان الأشخاص الذين تعرضت حساباتهم للاختراق باستخدام هذا الخيار تم إخطارهم مشيرا إلى أنه لم يتم تسرب أي أرقام هواتف أو معلومات أخرى عن المستخدمين.
وانخفضت القيمة السوقية لسهم شركة تويتر في البورصة بما يقترب من 7 في المائة مع بدء تعاملات الأسبوع يوم الإثنين.
وتزامن ذلك مع إعلان مجلس الشيوخ الأمريكي تقريرا يتهم روسيا باستخدام كل وسائل التواصل الاجتماعي للتأثير على الانتخابات الرئاسية الامريكية الأخيرة.

Wednesday, October 10, 2018

जीवन से जगत तक रहेंगी अग्रणी भविष्य की तकनीकें

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि हमारा समय तेजी से बदल रहा है, लेकिन यह भी स्वीकार करना होगा कि इस बदलाव का सबसे बड़ा आधार लगातार उन्नत हो रही टेक्नोलॉजी है. भविष्य में स्वास्थ्य, सेवा, विज्ञान, अर्थशास्त्र जैसे लगभग सभी क्षेत्रों में विभिन्न तकनीकों का दखल होगा और वे हमारे जीवन में बड़ी भूमिका भी निभायेंगी. हमारे भविष्य की प्रभावशाली और युगप्रवर्तक उन्नत तकनीकों की टाइमलाइन प्रस्तुत है आज के इन्फो-टेक में.. 
 
 
चेहरे एवं अन्य गतिविधियों पर आधारित सॉफ्टवेयर इस मशीनी युग में प्रगति कर भविष्य में (साल 2019 तक) आंखों द्वारा संचालित होने लगेंगे और मनोभावों को भी पकड़ सकेंगे.
 
 
इस तकनीक के अंतर्गत विशेष ढंग से डिजाइन किये गये पेपर सस्ते डायग्नोस्टिक साधनों का निर्माण करेंगे. जिससे साल 2020 तक इबोला, टीबी, ‍जीका, स्वाइन फ्लू आदि बीमारियों की तत्काल स्क्रीनिंग की जा सकेगी.
 
 
यह तकनीक 'सुपरबग्स' बैक्टीरिया को हराने के लिए सस्ता, शर्तियां इलाज उपलब्ध करायेगी और साल 2023 तक एंटीबायोटिक के असर के लिए मैक्रोलिड्स का निर्माण करेगी. 
  
2024 इंजेस्टिबल रोबोट
 
 इसके अंतर्गत, साल 2024 तक ऐसे माइक्रोबोट्स का निर्माण किया जायेगा, जो उपभोज्य व जैव संगत होंगे व शरीर के अंदरूनी जख्मों का इलाज करेंगे.
 
2026 स्मार्ट क्लोथिंग
 
नैनोपोरस फैब्रिक, मिनीयेचराइज्ड इलेक्ट्रॉनिक्स और हैप्टिक फीडबैक साल 2026 तक ‘स्मार्ट क्लोथिंग’ निर्मित करेंगे, जो रंग और आकार बदलेगा. इसके अतिरिक्त, यह आपको जरूरत के मुताबिक ठंडा व गर्म भी रखेगा.
 
 
 फोटोनिक्स तकनीक का मतलब ही है बैंडविथ में बढ़ोतरी, रेडियो फ्रीक्वेंसी से 100 गुना ज्यादा की डेटा रेट और अंतरिक्षयान के संचार के लिए कम ऊर्जा की आवश्यकता. यह तकनीक साल 2027 तक हमारे बीच होगी.
 
2028 वोल्कैनिक माइनिंग
 
वोल्कैनिक माइनिंग तकनीक द्वारा सक्रिय अन्त: समुद्री ज्वालामुखियों से कीमती धातु एवं खनिजों को निकालना साल 2028 तक सस्ता व सुलभ हो जायेगा.
 
स्पिन्ट्रॉनिक्स रेवोल्यूशन
 
स्पिन्ट्रॉनिक्स (इलेक्ट्रॉन स्पिन-ऑर्बिट टेक्नोलॉजी) के निजीकरण से स्मार्टफोन्स, ‘स्मार्ट’ टेक्नोलॉजी एवं इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी तकनीकों में क्रांतिकारी गति आयी है.
 
 
इस तकनीक के अंतर्गत, सीओ2 में खिंचे चले आने वाले इलेक्ट्रोकेमिकल सेल द्वारा बिजली एवं मूल्यवान उपोत्पाद पैदा किये जायेंगे और ऊर्जा व प्रदूषण का संकट एक साथ हल किया जायेगा.

 
 साल 2030 तक बाजार में आईएसजी15 परिवर्तन और अन्य आनुवंशिक उपचारों पर आधारित व्यापक पहुंच वाले एंटीवायरल दवाओं की उपस्थिति दर्ज की जायेगी.
 
 
आर्टिफिशियल हीरों में मौजूद रेडियोएक्टिव कचरे के कोषस्थीकरण द्वारा रेडिएशन को बिजली में तब्दील किया जायेगा. यह तकनीक 2031 तक हमारे बीच उपलब्ध होगी. 

 
ऑप्टोजेनेटिक इंजीनियरिंग और रिसर्च के एक दशक बाद पार्किंसन, अल्जाइमर, टौरेट, सिजोफ्रेनिया, आटिज्म और अन्य न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर का इलाज संभव हो पायेगा. 
 
2033 नैनो फिजिबिलिटी 
 
प्रकाश द्वारा संचालित फोटोमोटर्स और डीएनए से प्रेरित तकनीक अंततः सस्ती और व्यापक नैनो तकनीक के लिए उपलब्ध होगी. 
 
सस्ती सौर ऊर्जा
 
100 फीसदी  क्षमता वाले पेरोव्सकाइट एवं ऑर्गेनिक सौर सेल और बुनियादी तकनीकों में नयी खोजें सौर ऊर्जा को सुलभ बनायेंगी और व्यापक पहुंच देंगी. 

2034 हैक न किया जा सकने वाला क्वांटम इंटरनेट 
 
क्वांटम-की डिस्ट्रीब्यूशन के लिए जटिल फोटॉन्स का इस्तेमाल करने वाला सेटेलाइट नेटवर्क पूरी तरह से सुरक्षित और हैक न किये जा सकने वाले इंटरनेट का निर्माण करेंगे.  
 
 
सजीव वस्तुओं के व्यवहार से प्रेरित होकर ऐसी वस्तुएं तैयार होंगी, जिनसे सेल्फ-क्लीनिंग कपड़े, सेल्फ-रिपेयरिंग बिल्डिंग्स तैयार किये जायेंगे और प्लास्टिक पैकेजिंग का खात्मा किया जायेगा.

2036 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की क्रमागत उन्नति  
 
बिग डेटा एनालिटिक्स एवं भविष्य की राह दिखाने वाला एआई आने वाले समय में मौसम, चुनाव, जियोपॉलिटिक्स, एवोल्यूशन आदि काफी क्षेत्रों में साल 2036 तक विकास करेगा.
 
2037 घर-घर में 3डी प्रिंटिंग   
 
होम शॉपिंग का चरम देखने को मिलेगा, जब सस्ते 3डी प्रिंटर्स हर घर में देखे जायेंगे. सभी लोग किसी भी चीज का प्रिंटआउट ले सकते हैं. मसलन, किसी भी खरीदी हुई या इंटरनेट से डाउनलोड की गयी इलेक्ट्रॉनिक्स, फर्नीचर, खाना और दवाओं की फाइल्स आप प्रिंट कर सकेंगे.
 
 
वेब-सर्फिंग, इंफोटेनमेंट, मनोरंजन के साथ सहज ज्ञानयुक्त बातचीत का वातावरण इस तकनीक द्वारा मिलेगा. इसके अतिरिक्त, वीआर/एआर में आधुनिकता, प्रोजेक्शन मैपिंग, हेप्टिक्स और ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस आदि भी सुलभ होंगे.
 
 
माइक्रोबायल फ्यूल सेल, एनेयरोबिक डाइजेशन टैंक, लिथियम-आयन बैटरीज और सोलर सेल तकनीक आपके घर को वास्तव में एक सुरक्षित, आत्म-निर्भर ऊर्जा इकोसिस्टम में तब्दील कर देगा. 
 
 
जेनेट्रॉनिक्स के युग में जेनेटिक मैटेरियल्स द्वारा निर्मित माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स (सेल्फ-असेम्बलिंग) और लैपटॉप से भी छोटे डीएनए आधारित सुपरकंप्यूटर्स     हमारे बीच होंगे.
 
2041 होलोग्राफिक पेट्स             
 
इस दौर में होलोग्राफिक पेट्स (पालतू) नयी चीज होगी. बात करने वाले एआई होलोग्राम्स हमारे बीच होंगे, जो भावनाएं महसूस कर सकेंगे और उनका जवाब भी देंगे. इसके होलोग्राफिक डेटिंग साइट्स भी बड़े पैमाने पर संचालित होंगी.

Friday, September 14, 2018

नज़रियाः बीजेपी को असम की नहीं, आम चुनाव की चिंता?

रतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित कुमार शाह को एनआरसी यानी राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण से नया उत्साह मिल गया है.
वे हुँकारा भरते हुए कहते फिर रहे हैं कि "विदेशी नागरिकों को चुन-चुनकर निकालूँगा." उन्हें हिंदू ध्रुवीकरण का नया मंत्र मिल गया है और अब वे इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाने में जुट गए हैं.
और अमित शाह ही क्यों, तमाम बीजेपी नेताओं ने इसे नए जुमले की तरह दोहराना शुरू कर दिया है. उन्हें लग रहा है कि राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा की छौंक लगाकर इस विवाद को चुनावों में भुनाया जा सकता है.
धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण करने की इसमें उन्हें अच्छी-खासी गुंज़ाइश दिखाई दे रही है इसलिए उन्होंने इसे तपाना शुरू कर दिया है.
विदेशी घुसपैठ के मुद्दे को बीजेपी असम में काफ़ी अरसे से भुनाने की कोशिश करती आ रही है और उसे इसमें सफलता भी मिली है.
एनआरसी के रूप में उसके भाग्य से छींका भी टूट गया और अब अमित शाह चालीस लाख विदेशियों का विवादित आँकड़ा बताकर चुनावी अभियान पर निकल पड़े हैं.
हालाँकि राष्ट्रीय नेतृत्व के रुख़ के विपरीत असम में बीजेपी एनआरसी के सवाल पर धर्मसंकट में फँसी हुई है. वह अमित शाह की तरह आक्रामक नहीं हो पा रही. इसकी वज़ह भी साफ़ है. एनआरसी की अंतिम सूची में केवल मुसलमानों के ही नाम नहीं हैं. उसमें बड़ी तादाद में हिंदू भी शामिल हैं.
और तो और अंतिम सूची के हिसाब से उसके कई नेताओं या उनके परिजनों की नागरिकता भी ख़तरे में है. उसके विधायक रमाकांत देउरी और उनके परिजनों के नाम सूची में नहीं है.
इसके अलावा जनजातियों और गोरखा लोगों की तादाद भी अच्छी ख़ासी है. हिंदू जनजाति नामशूद्र के ही छह लाख लोगों के नाम सूची में नहीं हैं. वे पचास के दशक से बांग्लादेश से आकर बसते रहे हैं.
फिर चालीस लाख का आँकड़ा आगे जाकर कितना कम होगा इसका पता नहीं है. संभावना है कि इसमें उल्लेखनीय कमी आएगी.
ऐसी सूरत में विदेशी नागरिकों की संख्या के बारे में जो दावे वह करती रही है उसकी हवा भी निकल सकती है.
ज़ाहिर है कि ऐसे में असम बीजेपी एनआरसी के बल पर उछल-कूद नहीं कर सकती और करेगी तो उसे स्थानीय लोगों की नाराज़गी का सामना करना पड़ेगा.
इस समस्या से निपटने के लिए बीजेपी ने नागरिकता क़ानून में संशोधन करने का पाँसा फेंका है. संशोधन करके वह घुसपैठ करने वाले विदेशी हिंदुओं को नागरिकता देने की फिराक में है. मगर उसके सहयोगी दल ही विरोध कर रहे हैं.
असम गण परिषद जैसे दल घुसपैठियों के सवाल को धार्मिक आधार पर नहीं देखते. वे चाहते हैं कि विदेशी चाहे हिंदू हों या मुसलमान, उसे वापस भेजा जाना चाहिए.
ऐसे मे अगर बीजेपी ज़बरदस्ती करेगी तो वे सरकार से समर्थन वापस ले सकते हैं. यहां तक कि असम बीजेपी में भी फूट पड़ सकती है.
लेकिन बीजेपी हाईकमान शायद ही इसकी चिंता करेगा. राष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाले राजनीतिक फ़ायदे की तुलना में वह असम की कुछ लोकसभा सीटें खुशी-खुशी कुर्बान करने को तैयार हो जाएगी.
यही वह रणनीति है जिसके तहत अमित शाह कह रहे हैं कि अगर 2019 में बीजेपी जीतकर आई तो पूरे देश में एनआरसी लागू करवाएगी.
अमित शाह का अगला निशाना पश्चिम बंगाल है. बंगाल में भी मुसलमानों की अच्छी तादाद है. बांग्लादेश से लगे होने की वजह से हो सकता है यहाँ भी घुसपैठी मिल जाएं.
कैलाश विजयवर्गीय तो घोषणा ही कर चुके हैं कि उनका अगला निशाना बंगाल है.
इसी की जवाबी प्रतिक्रिया में मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने कहा था कि अगर ऐसा हुआ तो ख़ून की नदियाँ बह जाएंगी और गृह युद्ध हो जाएगा. लेकिन शायद बीजेपी को ममता की ये मुद्रा माफ़िक बैठती है. इस स्थिति में वह अव्वल तो मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरेगी और आगे चलकर सत्ता पर उसकी दावेदारी भी बढ़ जाएगी.

Thursday, September 6, 2018

英国要求福克兰群岛附近海域的主权

路透社报导英国要求接近福克兰群岛的南大西洋海底大区块的主权。这项举动引发英国与阿根廷之间对于可观的石油天然气蕴藏掌控权的外交争夺。上个月阿根廷针对大陆架的界线向联合国委员会提出他们自己的要求。

两个国家之间长期以来对于福克兰群岛主权(阿根廷称之为马尔维纳斯群岛)争执不下。此争论引发1982年的战争,冲突可能因矿产权的争夺而加剧。

英国此项宣示涵盖近福克兰群岛、南乔治亚岛和南桑德韦奇岛约一百二十万平方公里的面积。根据联合国海洋法公约,临海国家可开发距岸边至少两百海哩的大陆架天然资源。在特殊情况下可向外延伸达三百五十海哩。

联合国委员会正考虑超过四十项由多国提出希望扩张海底区域主权的要求。预计还有更多可能被提出。英国外交部官员向«路透社»表示,当国际间提出竞争性的要求,在各国解决争论以前,联合国委员会可能暂缓考虑其要求。
据《新科学家》杂志援引圣保罗大学的研究结果称,生物多样性热点巴西的大西洋雨林地区在过去的500年间不断萎缩,只剩下大约原本的1/10。圣保罗大学的科学家称,除非破坏能得以停止, 否则这个地区特有的猴类和鸟类就将濒临灭绝。

覆盖面积约达到150万平方千米的大西洋雨林孕育着2万多种植物,260多种动物,700余种鸟类,200余种爬行动物,280种两栖动物以及数百种尚未命名的生物。科学家更称,亚马逊雨林的持续退化使得巴西大西洋雨林的困境状态变得朦胧。

不幸的是,大西洋雨林的状况实际上已经非常糟糕,”科学家让保罗梅茨格说,“生物绝种速度将会加快,并且因为有30%的生物物种是该地区独有的,那么也就是说它们将会永远地消失。”

梅茨格的同事米尔顿里贝罗用卫星图像和植被图绘制了这整个区域的地图。他发现现存雨林中的80%被分裂成了小于0.5平方千米的小块,而每小部分之间的距离平均有1.4千米,这就使得动物们很难从其中一处迁移到另一处。另外,现存雨林中只有14%是被保护的,因为有70%的巴西人口现在就居住在曾经还是大西洋雨林的区域,这其中包括圣保罗和里约热内卢。

目前首要的就是保护海岸山脉沿岸靠近圣保罗的大片幸存雨林,并且修复雨林中各个小部分的连接以便于动物迁徙。一些濒临灭绝的灵长目动物,比如金狮绢毛猴和北部绒毛蜘蛛猴就栖息在这片区域中。科学»学刊报导,根据美国研究,与其转成乙醇注入汽车燃料箱,由作物转换为电力的生质燃料效益更佳。此项研究发现由谷物中取得的乙醇和倾草一旦转换成电力可使汽车跑得更远,排放较少量的温室气体。
尽管生质燃料在燃烧時会释放二氧化碳,等量的二氧化碳在下一批作物成长时會被再度吸收。因此生质燃料被广泛认为是比起石化燃料对环境更好的替代燃料。然而,一般还未充分了解的是究竟将作物转换为乙醇于传统内燃机中燃烧较佳,或燃烧作物产生电力驱动节能车较佳。

加州大学环境工程师艾略特.坎贝尔、墨西及其同僚实行了生化乙醇和生化电力科技的生命周期评估。他们比较在产制汽车和燃料过程中消耗的能源以及由生化乙醇及生化电力产生的能源后发现生化电力明显胜出。此团队指出由生质燃料转换的电力驱动的汽车跑得更远,多出百分之八十一。

坎贝尔指出使用作物产生电力驱动一台节能车将比生化乙醇驱动的车子释放更少的二氧化碳。电力引擎比起内燃机效率更高。他向«科学»学刊表示“即使是最佳的乙醇产制科技与节能技术仍不及使用作物产生的电力”。

然而,不同类型引擎的成本差异及可能产生的环境效应,包括空气污染和用水并未列在评估当中。

Tuesday, September 4, 2018

दलितों के खिलाफ हिंसा के 3 मामले जो बताते हैं 'कास्ट-फ्री इंडिया' कितना बड़ा झूठ है

रियाणा का मिर्चपुर. हरियाणा के हिसार में एक कस्बा. 24 अगस्त, 2018 को देश भर में ये नाम न्यूज़ चैनलों पर गूंज रहा था. तारीफ में नहीं. इसलिए कि यहां 7 साल पहले एक दलित बाप-बेटी को ज़िंदा जला दिया था. इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुना दिया है. कुल 33 लोगों को सज़ा हुई है. पहले से सज़ा पाए 13 लोगों की सज़ा बरकार रखी गई है, कुछ की बढ़ी भी है. इनमें से 12 लोगों को उम्रकैद की सज़ा हुई है.

आपका कोई न कोई ऐसा दोस्त ज़रूर होगा, जो आपसे कहता होगा कि ये कास्ट-वास्ट सब बीते दिनों की बातें हैं. पहले होता था, अब नहीं होता. अब जो मेहनत करता है, आगे बढ़ जाता है. मेरिट का ज़माना है. हमारा सुझाव है कि अपने उन दोस्तों को आप मिर्चपुर कांड की पूरी कहानी सुना सकते हैं. ये कहानी आपको इस लिंक पर मिल जाएगी. इसमें आपको उन सारी बातों का ज़िक्र मिलेगा जो अपके दोस्त को लगता होगा कि पुराने किसी युग में होती होंगी. मसलन ”ऊंची” जाति वाले मर्दों का उन औरतों को छेड़ना, जिन्हें वो ”छोटी”
जाति का मानते हैं. या फिर कुत्ते के भौंकने जितनी छोटी बात पर पूरी प्लानिंग के साथ अगड़ी जाति के लोगों की भीड़ का दलितों की बस्ती को आग लगा देना. ये जानते हुए कि एक घर में पोलियो ग्रसित लड़की और उसके पिता बंद हैं.
अगर आपका (या आपकी) दोस्त कहे कि ये एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. लेकिन एक एक्सेप्शन है, तो आप उसे हरियाणा के ही तीन बड़े कांड बता सकते हैं. सारे दलितों के खिलाफ हिंसा के. और सभी कमोबेश एक ही पैटर्न पर.
दुलीना कांड
15 अक्टूबर 2002 को दशहरे की शाम झज्जर में कुछ लोगों को सड़क पर मरी गायें नज़र आईं. इन लोगों ने 5 दलित लड़कों को पकड़ा और दुलीना पुलिस पोस्ट ले गए. इनमें से तीन लड़के चमड़े का काम करते थे. लड़कों को पुलिस के पास ले जाने वाले लोगों का कहना था कि ये लड़के गुड़गांव – झज्जर रोड पर गोकशी करते पकड़े गए थे. अभी शाम के सवा छह बज रहे थे.
गोकशी की बात सुनते ही दुलीना पुलिस पोस्ट के बाहर लोग जुटने लगे. नारेबाज़ी करने लगे. कुछ लोग भीड़ को उकसा रहे थे और तनाव बढ़ रहा था. लेकिन पुलिस ने भीड़ पर काबू करने में गज़ब की लापरवाही दिखाई. रात 8 बजकर 43 मिनिट पर जाकर झज्जर पुलिस लाइन्स से अतिरिक्त पुलिस मांगी गई. हर बीतते पल के साथ भीड़ में गुस्सा बढ़ रहा था. रात 9 बजकर 45 मिनिट पर भीड़ काबू के बाहर हो गई और इन लड़कों को पुलिस पोस्ट से बाहर निकाल लिया गया.
पुलिस प्रशासन की आंखों के सामने भीड़ इन लड़कों को पीटने लगी. उतने में किसी ने इन लड़कों की गाड़ी में आग लगा दी. पास के एक झोंपड़े को भी आग ने अपनी चपेट में ले लिया. दो दलितों को पीटकर इसी आग में फेंक दिया गया. बाकी तीन को भी इतना पीटा गया कि उनकी जान चली गई. रात सवा दस तक सभी पांच दलित लड़के मारे जा चुके थे. इसके बाद जाकर पुलिस लाइन से अतिरिक्त बल दुलीना पुलिस पोस्ट पहुंचा.
पुलिस ने भीड़ के खिलाफ तो मामला दर्ज किया, मरने वाले दलितों पर भी गोकशी की धाराएं लगा दीं. इंक्वायरी कमीशन के सामने इस पूरी घटना के चश्मदीद पुलिसवालों ने बयान दिया कि भीड़ को भड़काने में झज्जर गौशाला के चेयरमैन का हाथ था. लेकिन उनका नाम एफआईआर में लिखा ही नहीं गया. न उन 14 लोगों का नाम एफआईआर में आया जो लड़कों को पकड़कर पुलिस पोस्ट लाए थे और लिंचिंग के दौरान मौजूद थे.
9 अग्सत 2010 को मामले के 7 आरोपियों को उम्रकैद की सज़ा हुई. 19 आरोपी छूट गए. फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में है और सभी आरोपी बेल पर हैं.

गस्त, 2005 को सोनीपत के गोहाना में वाल्मीकि लड़कों से मारपीट में एक जाट लड़के की मौत हो गई. इसी दिन पुलिस ने 7 वाल्मीकि लड़कों पर मामला दर्ज कर 4 को गिरफ्तार कर लिया. लेकिन गुस्से से भरे जाटों ने 28 अगस्त को एक महापंचायत करके पुलिस को धमकी दे दी कि अगर 48 घंटों में सभी वाल्मीकि आरोपी गरफ्तार नहीं हुए तो वाल्मीकि बस्ती में आग लगा दी जाएगी.
29 अगस्त से वाल्मीकियों ने अपने घर छोड़ने शुरू कर दिए. इल्ज़ाम है कि पुलिस भी वाल्मीकियों को घर छोड़ने को कह रही थी. 30 तारीख तक तकरीबन 2000 वाल्मीकि घर छोड़ चुके थे.
नेशनल कैंपेन ऑन दलित ह्यूमन राइट्स की आउटलुक मैगज़ीन में 5 सितंबर, 2005 को छपी रिपोर्ट के मुताबिक 31 अगस्त, 2005 को जाटों की एक और महापंचायत हुई. इसके बाद 1500 जाटों की एक भीड़ वाल्मीकि बस्ती की ओर बढ़ी. इनके पास पेट्रोल, केरोसीन और लाठी-डंडे थे.
इस भीड़ ने तकरीबन 200 पुलिस वालों की मौजूदगी में 4 घंटे तक उत्पात मचाया. पुलिस ने 12 राउंड हवाई फायर किए. लेकिन 50-60 वाल्मीकि घर आग में जलकर खाक हो गए. 2012 में इस मामले की सुनवाई करते हुए पंचकूला की सीबीआई अदालत ने सभी 11 आरोपियों को बरी कर दिया था. इस मामले में सोनीपत से भाजपा सांसद रहे किशन सिंह सांगवान का बेटा भी आरोपी था. फैसला आने से पहले 3 आरोपियों की मौत हो गई थी.
करनाल के पास पड़ता है सालवन. 26 फरवरी, 2007 को दो लड़के जानवर चराने निकले. जानवर एक खेत में जा घुसे. खेत का मालिक जब पहुंचा तो लड़कों और मालिक में विवाद हो गया. मारपीट भी हुई. जानवर चराने वाले लड़के प्रदीप और लीलू वाल्मीकि थे और खेत मालिक महिपाल था राजपूत. प्रदीप और लीलू वापस चले आए और अपने साथ और लोगों को लेकर दोबारा महिपाल के पास पहुंचे. इन्होंने महिपाल को इतना पीटा कि उसकी जान चली गई.
अगले दिन महिपाल के अंतिम संस्कार के बाद राजपूतों ने बड़ी चौपाल पर एक मीटिंग रखी. मीटिंग के बाद वाल्मीकि बस्ती को लूटपाट के बाद आग लगा दी गई. 25 वाल्मीकि घायल हुए जिनमें एक गंभीर था. 2 मार्च को एक वाल्मीकि लड़के की मौत हो गई. ये महिपाल को मारने के आरोपियों में से एक का रिश्तेदार था.
ये हरियाणा के तीन बड़े मामले हैं जिनमें दलितों के खिलाफ अत्याचार हुए. और इनका एक पैटर्न है. पहले दलितों और अगड़ी जातियों के बीच एक छोटा विवाद होता है. इसके बाद अगड़ी जातियों के लोग इकट्ठा होकर दलित बस्तियों पर पूरी प्लानिंग के साथ हमला करते हैं. इन तीन बड़े मामलों के अलावा हरियाणा में नियमित अंतराल पर दलियों और अगड़ी जातियों के बीच संघर्ष होता आया है. और इस संघर्ष के बाद दलित कुछ समय के लिए या फिर मिर्चपुर की तरह हमेशा के लिए विस्थापित हो जाते हैं.
अपने दोस्त को ये भी बताएं कि हरियाणा कोई पिछड़ा राज्य नहीं है. ये वही राज्य है जहां से खेलों में सबसे ज़्यादा मेडल आते हैं और ग्रोथ रेट (जिसमें ‘मेरिट’ भी बहुत काम आती है) के मामले में हरियाणा देश के औसत से कहीं आगे है. आप चाहें तो अपने दोस्त को ये भी बता सकते हैं कि हिंदुस्तान में हर 18 मिनिट में एक दलित के खिलाफ हिंसा होती है और दिन बीतते तक 2 दलितों की जान जा चुकी होती है.
इनते पर भी आपका दोस्त न माने तो आप हार मान लीजिएगा. किसी और को पकड़कर ये कहानियां सुनाइएगा. आप दो लोगों को हमारे मुल्क की असल स्थिति का अंदाज़ा दिला पाए तो काम बन जाएगा.


Thursday, August 30, 2018

纽约气候峰会:推动长期气候中和的良机

本月,联合国秘书长将主持召开一场大型的气候峰会:世界各国首脑和地区、城市、企业以及组织的领导者应该借由此次峰会,提出有见解的新的应对短期及中期气候变化的计划。

此次峰会也应该推出一项清晰的能够指导人类应对气候变化,雄心勃勃的,科学可信的长期规划。目前亟需雄心勃勃的行动计划,减缓2020年达到全球排放峰值前温室气体排放的增长速度,尽早落实推动具备清洁性和适应性的发展政策。

但正如年轻人制定自己的职业规划、市长谋划未来人口发展、企业制定商业策略一样,应对气候变化也需要有长期的愿景,明确未来五十年左右的发展道路。而这个长期的愿景就是在本世纪后半页尽快实现“气候中和”—人类向大气中排放的温室气体量应少于自然过程消耗的温室气体量。

联合国气候科学小组的研究已经充分证明,如果要实现将全球气温上升控制在2摄氏度以下的目标,就必须在21世纪末之前将全球温室气体排放量降至零或者接近零的水平。这也是保证贫困和易受灾的人们免受不断威胁他们生命和生计的热浪、粮食绝收、洪水和水资源短缺等灾害侵袭的最好方式。温室气体持续并不受控制的排放将导致地球气候系统发生不可逆转的改变,给社会各个层面带来极大的损害,这是我们不能承受的风险。

我们必须认清这点。气候中和既不是凤凰涅盘也不是平行宇宙——它旨在大幅度降低温室气体排放,使得进入大气的温室气体量与地球能够吸收的温室气体量持平。为此,我们必须制定新的发展路径,改变目前高排放的发展方式——包括最初通过某种程度上经过核证的碳补偿手段——到实现全球经济的深度脱碳,最终达到世界各国的碳中和。

我们也需要尽快转变对生态系统健康的评价方式,保证大自然在大气脱碳过程中发挥比以往更加核心的作用。这要求我们加大对绿色清洁能源以及交通和建筑能效领域的投入,并通过更加智能的管理维持、拓展和恢复森林和土壤资源。

总体而言,对于整个地球来说,这是一条成本较低的经济发展道路,不仅可以避免气候变化带来的巨大损失,还能够通过推动绿色建筑、低能耗交通系统等气候友好型基础设施和自然资源管理创造大量就业。毫无疑问,这项工作是雄心勃勃的,并且需要长期的努力。因此我们现在所做的每一个决定都必须充分考虑到长期的愿景,向着最终目标努力。

在2014年,碳中和似乎仍然是一个苛求。尽管新能源的使用范围日益扩大,许多国家提高了能效,多方已经采取了行动,比如以可持续的方式管理森林等自然资源,但全球温室气体排放仍在攀升。不过一些具有远见的国家已经开始将经济转向正确的方向:这些国家中既有不丹、哥斯达黎加,也有巴布新几内亚、瑞典和瑞士。

与国际地区环境倡议理事会等组织建立联系的许多城市已经制定了雄心勃勃的长远计划,有些甚至提出要将温室气体排放量降低80%、90%、甚至100%。这些勇于进取的城市中包括哥本哈根、斯德哥尔摩、奥斯陆和西雅图。一些具有远见的企业也纷纷加入,它们中很多都是互联网、高科技和银行业领域的知名公司。9月23日联合国秘书长潘基文主持召开会议旨在振奋各方斗志,为今年12月在秘鲁举行的联合国气候会谈以及2015年年底在巴黎举行的重要会议做好准备。

各国已经同意在巴黎会议上签订一项具有转折意义的新协定。该协定将推动全球温室气体排放的进一步降低,并帮助贫困和易受灾的人民更好地适应气候变化的影响。但正如科学研究已经证明的那样,要真正地消除贫困,创造一个属于我们所有人的和平安宁的世界,人类还有很长路要走。

要达到这个目标,我们必须明确在本世纪下半叶实现气候中和的长期目标,从而让全球超过90亿的人口拥有一个令人兴奋的,健康运转的地球,造福子孙后代。

Tuesday, August 28, 2018

苹果承诺在中国打造绿色形象

美国科技巨头苹果公司称将大幅降低本企业在中国的碳足迹。苹果公司在中国的代工厂每年夜以继日地生产了亿万部智能手机和平板电脑。

苹果公司上月宣布将在中国投资太阳能产业。首席执行官蒂姆·库克周一表示,苹果将鼓励富士康、和硕联合等台资驻华电子代工厂开发可再生能源项目。

苹果公司是全球市值最大的公司。去年,苹果称其在2013财年的排放量为3300万吨二氧化碳当量,其中大部分来自生产备受追捧的 等产品的大型工厂。

蒂姆·库克在一篇新闻稿中说道:“我们以身作则,让自己的数据中心、零售店和企业办公室都用上了清洁能源,并且我们准备好率先减少生产制造环节的二氧化碳排放。”

“这项工作不可能一蹴而就,它需要多年的努力,但这是我们必须要做的重要工作。以苹果公司目前独一无二的地位,完全具备带头实现这一宏伟目标的能力。这是我们的责任。我们很高兴能够与供应链上那些愿意走在中国绿色转型前沿的企业领导者一起努力。”库克补充道。

为了有效降低苹果的碳足迹,富士康及供应链上的其他企业需要增加低碳能源的使用。在一个约三分之二的电力都依赖于燃煤的国家,要做到这点并非易事。

挑战

富士康的大型加工厂的生产丝毫不能停顿。因此,风能和太阳能这样的间歇性发电技术必须以当地能源储备为后盾,如使用大容量电池等。虽然这项技术发展迅速,但目前尚不足以满足富士康加工厂的电力需求。

在中国,为了提高对远距离可再生能源使用的可靠性,首先还必须进一步对电网进行现代化升级。

为降低在中国的碳足迹,苹果已开始涉足太阳能发电领域。同时,这项技术也可以为数据中心和零售门店提供电力。

纸张

苹果公司还在中国推出了一项“用纸平衡”计划,通过种植和保护一百万英亩的可持续森林资源,不仅能够为苹果公司提供包装材料,还能够全面降低其生态足迹。

苹果公司或许需要明确表明将通过何种方式提高其能源消耗中的可再生能源占比,并以此说服那些曾指责苹果公司对供应链遮遮掩掩的批判人士。

在过去几年里,苹果公司不得不应对一些指控,如代工厂虐待工人、其供应商在开采和生产iPhone等产品中所使用的稀土的过程中造成了大面积的水土污染等。

点击这里了解中外对话其他有关苹果公司供应链的文章。